एहसास-ए-जुर्म (Guilt)

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हर फैसला उसका ही तो था
मुलाक़ात की इल्तिजा भी, नागहाँ बेगानगी भी
मोहब्बत की इब्तिदा भी, आखरी अल्विदा भी
जाने क्यों फिर भी एहसास-ए-जुर्म से मेरा सुकून तबाह है
– कृत्या

 

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