मेहर-ए-शायर (Love of a poet)

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शायद ज़माने को इश्क़ हो जाता हमसे, गर तेरा फितूर हम होते
शायद ज़माने से इश्क़ हो जाता हमें, गर मेरा सुरूर तुम होते
मैं ढल जाती तेरी तहरीरों में तेरे लफ़्ज़ों से ज़ीनत उधार लेकर
तुम मेरे शिकस्ताह जज़्बों को अपनी शोखियों से रंग गए होते
– कृत्या

The world would have fallen in love with me, and I would have learned to love the world,   if I were your love and  you were mine. I would blend into your compositions, embracing the beauty of your words, and you would have colored my disappointments with your cheerfulness. 

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